पीआरपी थेरेपी क्या है ?

पीआरपी थेरेपी क्या है ?

बालों का झड़ना चिंता का विषय है , जो की आजकल की भागती जिंदगी को रोक भी देता है , क्यूंकि गांजा होने पर वयक्ति का आतम विश्वास टूट जाता है |
पहले बाल धीरे-धीरे काम होना शुरू होते हैं , तब मुनस्य को इसका एहसास नहीं होता , लेकिन जब बात गंजेपन तक पहूंचती है , तब उपचार करवाने की बात होने जेहन में आती है |

गंजेपन और बालों का झड़ना रोकने के काफी से उपचार प्रचलित है |
ऐसा ही एक उपचार है पीआरपी थेरेपी |
गंजेपन के लिए बहुत सी सर्जिकल तकनीकें भी उपयोग की जाती है लेकिन पीआरपी एक नॉन-सर्जिकल तकनीक है | बालों की पुण्यप्राप्ति के लिए आजतक इसमें बहुत अच्छे नतीजे दिए हैं |

कैसे काम करता है पीआरपी –

इसे प्लेटलेट -रिच-प्लाज्मा तकनीक भी कहा जा सकता है | प्लाहा शरीर में हर किसी विकास के लिए जरूरी होता है न, नए शैल , कोशकाएँ एवं बाल तक उगने में इसका महतवपूरण योगदान होता है |

मरीज के खून से एक खास विधि दवारा इस प्लाज्मा को निकाला जाता है और बाकि का खून अपने आप कुछ समय बाद प्लाज्मा का निर्माण कर लेता है |

इस प्लाज्मा को मरीज की चमड़ी में जहा पर भी बाल उगने है उसमे प्रवेश करवा दिया जाता है | इसमें मरीज को किसी बड़ी चिकत्सा की जरूरत नहीं है , सिर्फ थोड़ा सा खून निकाला जाता है | उसमे से प्लाज्मा को निकाल कर सीधे भारी चमड़ी में इंजेक्ट कर दिया जाता है|

कौन करवा सकता है पीआरपी ?

यह एक गैर -सर्जिकल पर्किर्या है इसे हर कोई , जिसके भी बक काम हो रहे हो ,करवा सकता है | पुरषों में जिनके बाल पूरी तरह से गए गए हैं , या खोपड़ी पर कोई -कोई जगह खाली हो गए है , उनके लिए यह एक अच्छा उपचार है | इससे बाल लगये नहीं जाते बल्कि पलजमा की मदद से अपने आप आ जाते हैं | महिलों और पुरषों में यह एक जैसा ही काम करता है |

अच्छे परिणाम पाने के लिए इस पर्किर्या को दो सप्ताह के अंदर कई बार करने की आवशकता होती है | आपको चमड़ी , गंजपन की किसम और प्लाज्मा के हिसाब से आपका चिकत्सक बतएगा की कितनी बार आपको यह पर्किर्या करवानी पड़ेगी | बालों के जल्दी विकास के लिए कुछ दवाएं भी जरूरी होती हैं |

अगर आप काफी समय से गंजेपन से पीड़ित हैं | आपके सिर पर एक भी बाल नहीं बचा है तो यह आपके लिए प्रभावी नहीं है |

यह एक लम्बी पर्किर्या है | इसके पूरा होने से एक साल बाद तक बाल आते हैं | दो साल तक आप पुरे बाल देख सकते है | यह एक प्रभावी उपचार है लेकिन काफी धीरे काम करता है, क्यूंकि इसमें कुदरती तरिके से बाद उगाये जाते है , लगये नहीं जाते |